Thursday, January 22, 2015

सरोज सिंह की कवितायें

7 comments:

  1. अंजू ,आपकी इस सुन्दर प्रतिक्रया एवं साझेदारी के लिए मेरे पास शब्द नहीं है..... आप जैसे दोस्तों से ही हौसला मिलता रहा है ..... ! ..खूब सारा स्नेह एवं आभार!

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  2. सरोज के व्यक्तित्व की तरह ही है उसकी कवितायेँ... सुलझी , उर्जावान और गहराईयों को खुद में समेटे हुई ...अंजू इस पोस्ट को साँझा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया रश्मि ।

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  3. कल 24/जनवरी/2015 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  4. सरोज की कविताएँ पढ़ते हुए हम भूल जाते हैं कि लिखा हुआ पढ़ रहे हैं बल्कि अनुभव की तरह हमारी आँखों के रूबरू दृश्य उपस्थित कर एक प्रश्न चिह्न बना जाता है .स्वयं को सजग करती सरोज की कविताएँ समाज पर अमिट छाप छोड़ने में सफल होगी . इस विश्वास के प्रति मैं आश्वस्त हूँ .

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  5. अच्छी कविताएँ !! पहली कविता पढ़कर मंटो की एक कहानी याद आ गई ...बहुत ही मार्मिक कविता . हार्दिक बधाई सरोज जी को . आभार स्वयंसिद्धा !!
    - कमल जीत चौधरी .

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  6. खूबसूरत यथार्थ का चित्रण, सरोज जी बहुत बहुत धन्यवाद ऐसी कविताओं के लिए...

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